20 Sep 2013

Baba Ramdev stoped on Heathrow Airport


बाबा रामदेव जी को लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन मे पिछले 6 घण्टे से रोका गया है।


पहले इमिग्रेशन वालों ने रोका फिर कस्टम वालों ने।

इमिग्रेशन के उस एरिया मे इस प्रकार से तभी रोका जा सकता है जब भारत की सरकार लंदन की सरकार को कहे की जो भी ये यात्री जा रहा है ये कोई अपराधी है।

ब्रिटेन के "चैनल फोर" ने खबर ब्रेक किया की बाबा रामदेव को भारत सरकार के एक गुप्त खबर के आधार पर हिरासत मे लिया गया था। भारत सरकार ने ब्रिटिश अथोंरिटीज को सूचना दिया था की बाबा रामदेव के पास कुछ आपत्तीजनक सामाग्री है।

ऐसे मे बाबा रामदेव कोई अपराधी नहीं हैं लेकिन जिस प्रकार कॉंग्रेस हिन्दू साधू-संतों को एवं कॉंग्रेस के खिलाफ खड़े होने वाले सभी लोगों को गलत तरीके से फंसा रही है वो देख कर यही कहा जा सकता है ये सरकार अब सिर्फ जूतों की भाषा सुनना चाहती है।



Arvind Kejriwal the Traitor - Part 8


केजरीवाल का एक और घोटाला

मेरे मित्र अवधेश पाण्डेय जी से मिली ये जानकारी। चूंकि मेरा प्रोफेशन भी प्रोमोशन (ऐडवरटाइजिंग) है एवं इस कार्य मे पिछले 7 सालों से होने के चलते इसकी कई बारीकियाँ मुझे पता हैं।

जैसा की आप मेल मे सीधा-सीधा देख सकते हैं कि 2 लाख से 100 लाख तक महिना कमाने वाले 4.20 लाख लोगों को ये मेल भेजा जा रहा है। अब इतना कमाने वालों का सर्टिफाइड डाटा तो सिर्फ एक ही जगह से मिल सकता है और वो है इन्कमटैक्स डिपार्टमेन्ट। अब आम आदमी पार्टी के तरफ से इन्कम टैक्स डिपार्टमेन्ट से ये डाटा कौन ला सकता है सभी समझ सकते हैं इस छोटी से बात को।

साथ ही यहाँ दूसरी बात ध्यान ये देने वाली है की केजरीवाल कह तो दिल्ली की रहे हैं केवल लेकिन ये मेल पूरे भारत मे भेज रहे हैं अतः जो डाटा संख्या यहाँ बताई गई है वो असल मे इस संख्या से कई गुनी ज्यादा हो सकती है।

ये डाटा सिर्फ और सिर्फ अरविंद केजरीवाल के कहने पर एवं उनके अपने पुराने भ्रष्ट दोस्तों से गुजारिश करने पर ही मिला होगा केजरीवाल को। मतलब केजरीवाल का एक और भ्रष्ट कनेक्सन।

लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है की भारत का कौन सा नागरिक कितना टैक्स भरता है ये गुप्त रखा जाता है, एवं उस लिस्ट को सार्वजनिक करना या किसी भी माध्यम से अपने फायदे के लिए उपयोग मे लाना गैरकानूनी है। पर चूंकि केजरीवाल भारतीय कानून ना सिर्फ ऊपर हैं बल्कि इनको भारतीय कानून पर तनिक भी भरोषा नहीं है अतः इन्होने ये गैरकानूनी कार्य बड़े ही सरल अंदाज मे कर लिया।

अब इस मेल की दूसरी बानगी देखिये, पानी पी-पी कर मोदी जी को भ्रष्ट कहने वाले केजरीवाल अपने इस मेल मे मोदी जी को भ्रष्टाचार मुक्त एवं एक अच्छी सरकार देने वाला बता रहे हैं। अब ये केजरीवाल का दोगलापन (गाली नहीं सिर्फ संज्ञा) नहीं है तो क्या है।

वैसे ज्ञात रहे की केजरीवाल के लगातार मोदी जी के अंध विरोध एवं अनाप-सनप बकने के चलते आम आदमी पार्टी के कई कार्यकर्ता समूहिक इस्तीफा दे चुके हैं केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से।


17 Sep 2013

Mujaffarnagar riot and vote bank politics


उत्तराखंड त्राशदी के समय भी बीजेपी के नेताओं को तब तक नहीं जाने दिया गया जब तक की पप्पू नहीं पहुँच गया वहाँ अपनी नौटंकी दिखाने, कश्मीर दंगे के समय भी ऐसा ही देखने को मिला की बीजेपी के नेताओं को नहीं जाने दिया गया वहाँ जब तक की कोंग्रेसी नहीं पहुँच गए।

अब प्रदेश मे कॉंग्रेस से घोर दुश्मनी दिखाने वाले लेकिन केंद्र मे कोंग्रेसी टुकड़े पर पलने वाले मुल्ला-यम ने दिखाया अपना दोहरा चरित्र।

मुजफ्फर जाने वाले हर बीजेपी नेता को गिरफ्तार किया लेकिन मन्नू, पप्पू और उसकी इटालियन अम्मी को जाने की ना सिर्फ इजाजत दी बल्कि कई सारी और सहूलियतें भी।

अब यही मुल्लायम प्रदेश के बीजेपी नेताओं को वहाँ आने नहीं दे रहा है लेकिन जिसका उत्तर प्रदेश तक से कोई नाता नहीं है और खुद एक आतंकवादी है पर कॉंग्रेस के चलते बचा हुआ है बकरुद्दीन मवेशी को आने के लिए पलक-पावड़े बिछाये बैठी है ये सपा सरकार।

लेकिन इन सबके बीच एक ही बात कॉमन है की सभी के सभी ये तथाकथित धर्मनिरपेक्षी अवैध असलहा रखने वाले एवं दंगे भड़काने वाले शांतिप्रिय कौम के दहलीज पर ही अपना मत्था टेक वोट की भीख मांग वापस चले आ रहे हैं। करें भी क्यूँ ना ये दोहरे चरित्र वाले....आखिर इनको असलियत पता है की मुस्लिम कहीं भी वोट देगा एक मुश्त वोट देगा। लेकिन हिन्दू तो बिखरे हुए हैं। उनके भाई-बहन मार दिये जाएँ, बहनों की इज्जत उनकी आँखों के सामने लूट ली जाए तब भी दोगले बन उन्ही को वोट देंगे जिंहोने ऐसा जघन्य कार्य किया। ये हिन्दू उन्ही को वोट देंगे जो घूम-फिर का कॉंग्रेस के पाले मे गिरे।

जाट खुद को बहुत आगे मानते हैं और मुस्लिम विरोधी कहते हैं लेकिन वोट किसको देंगे रालोद को जो की अजित सिंह की पार्टी है और अजित सिंह खुद कॉंग्रेस के फेंके बोटी पर पलने वाला नरपिशाच है। वैसे भी इस दंगे मे मुजफ्फर नगर खुद अजित सिंह नहीं गया लेकिन अपने लड़के को भेजा। अब जाटों ने भी देखा ही होगा की अजित सिंह का लड़का जाटों के द्वार पर थूकने भी नहीं गया और केवल अपने वोट बैंक अवैध असलाहाधारी मुस्लिमों से मिल कर लौट आया।

साथ ही जब ये सभी अपनी वोट बैंक की राजनीति कर लौट आए मुस्लिमों के चौखट पर मत्था टेक कर, तब सेक्स सीडी के महानजनक अभिसेक्स मनु भिंगवी को अपने यहाँ बुला कर बुरखा धत्त अब ये प्रचार करने मे लग गई है की नेताओं को दंगाग्रस्त स्थलों से दूर रहना चाहिए ताकि जब बीजेपी के नेता या कोई हिन्दूवादी वहाँ जाए तो उसको सांप्रदायिक या दंगा भड़काऊ कह कर उसका दुष्प्रचार चालू कर सके ये कॉंग्रेस के टुकड़ों पर पलने वाली गंदी महिला जो पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को दलाली का अड्डा बना रखी है। ऐसी ये अकेली नहीं है बल्कि आज हालत ये है की इस पत्रकारिता के पेशे मे एक दलाल ढूंढो तो हजार मिलते हैं। पूरा पत्रकार जगत ही जैसे दलालों का अड्डा नजर आने लगा है। किसी विशेष पार्टी या उक्त विशेष पार्टी को लाभ पहुँचने हेतु विशेष कौम को अच्छा एवं दूसरे कौम को हर छोटी बात मे भी गंदे तरीके से घसीटना ये इस पत्रकार जगत का पेशा हो गया है।

अब समय आ गया है की हिन्दू चाहे वो किसी भी जाति का हो, अपने वोट की अहमियत को समझे और ये देखने की कोशिस करे की उसका वोट अंत मे किस पार्टी के काम मे आ रहा है। वो अमुक पार्टी उस हिन्दू या देश के किसी भी हिन्दू के साथ कितनी खड़ी है। हिंदुओं के हित की कितनी रक्षा करती है एवं मानमर्दन करती है हिंदुओं के हितों का। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो दिन दूर नहीं जब भारत भी पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान की श्रेणी मे आ कर अपने अतीत को कोस रहा होगा एवं हमारी आने वाली पुश्तें हमें फूल माला नहीं चढ़ा रही होंगी बल्कि  गालियों से नवाज रही होंगी।


9 Sep 2013

Mullayam Red Cap: Colored in Hindu Blood



कुर्ता इनका है हरा, चादर भी इनकी है हरी-हरी,
हरा है रंग बिछावन का, दीवाल भी इनकी है हरी,
लेकिन बंधु तुम ये जान लो, बात मेरी खरी-खरी,
नेता जी उठा चुके हैं, अपनी धोती और चादर हरी।

सोचते सब नेता जी को, शोभे रंग हरा शूरमेदानी है,
सोचे जो ऐसा, क्या कहें उसको, ये उसकी नादानी है,
नेता जी तो जीते हैं, बस खातिर अपने ही लाल के,
चहुओर पाले हैं गुंडे, जो मचाते खातिर इनके बवाल हैं।

बादामी है रंग इनके खद्दर का, टोपी पहनते हैं ये लाल,
टोपी लाल रंगने खातिर, मत पुछो किए कितने बवाल,
सेक्युलर के हरे खून से, रंगते हैं नेता जी अपना रुमाल,
हिन्दू के खून से, रंगवाते हैं अपनी खानदानी टोपी लाल।

टोपी-टोपी करते हैं ये, टोपी अपनी ये लाल रंगवाते हैं,
इस लाल रंग की खातिर, हमेसा हिन्दू का खून बहाते हैं,
कटवा कर हिन्दू को, ये उसका खून अपने पास मँगवाते हैं,
हिन्दू के खून से ये अपनी खानदानी टोपी लाल रंगवाते हैं।

टेढ़ी नाक, तोतली जुबान, दिल है इनका तो बेईमान,
ना है इनका कोई धर्म, ना कभी रखते हैं ये कोई ईमान,
हाड़-मांस का देखो, कलयुग मे आया है ये ऐसा शैतान,
मुल्लों से करता गलबहियाँ, हिन्दू की काटे ये जबान।

ना देखा इस जैसा, मैंने अब तक कोई ठरकी इन्सान,
बातें करता समाजवाद की, पर चलाता ये परिवारवाद,
लेकर लोहिया की कमान, बन बैठा ये तोतला पहलवान,
नाम से हिन्दू, लेकिन फैलाता है केवल ये मुल्लावाद।


8 Sep 2013

Why media keep silence on anti-national Christian and Muslims


Opus dei इसाई समुदाय द्वारा पोषित मीडिया वाले जैसे दीपक चौरसिया और विजय विद्रोही लगातार टीवी चैनल पर "सर्व धर्म समभाव" का पाठ पढ़ाते दिख रहे हैं! क्या यह जनता को दिग्भ्रमित करने वाला नहीं है? क्यों मीडिया वाले सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत नहीं रखते? या तो इनको इस देश की सभ्यता और संस्कृति का ज्ञान ही नहीं है या यह जानबूझ कर पैसा खा कर देशद्रोह और मक्कारी कर रहे हैं! 

क्यों मीडिया के मस्जिदों में पनपते 'इस्लामिक आतंवाद' की बात नहीं करते? क्यों वह नहीं बताते की आजकल मदरसों में केवल आतंकवादियों का निर्माण हो रहा है! क्यों नहीं बताते कि मस्जिदों में प्रतिबंधित अत्याधुनिक बिना लाइसेंस के हथियार संगृहीत कर के रखे जाते हैं जिसका कि दंगा फसाद में अनुचित और बर्बर प्रयोग होता है! अगर सच से आगाह करा दिया जाता तो पता नहीं कितने मासूम लोगो की जान बच जाती! क्यों मीडिया ऐसे "सर्व धर्म समभाव" की बात कर रही है जिससे की आतंकवादियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं? आतंकवादियों को पता है कि सारे कुकर्म करने के बाद भी उनको मासूम घोषित कर दिया जायेगा और भले ही दंगा उन्होंने शुरू किया हो इसका आधा श्रेय मासूम जनता के सर मढ़ दिया जायेगा! फिर क्या वह बरी और आज़ादी से फिर दंगा फसाद करने को स्वतंत्र! क्यों मीडिया 'विषधर नाग' को 'रस्सी' जैसा हानिरहित बता कर मासूम लोगो तो खतरे की तरफ लगातार धकेल रही है? क्या इसके लिए इनके खिलाफ PIL दाखिल नहीं होनी चाहिए?

कैथोलिक चर्च में हो रहे कुकर्मो की बात क्यों नहीं करती है मीडिया? दीपक चौरसिया और विजय विद्रोही जैसे मूर्खो को तो शायद यह भी नहीं पता होगा की जीसस स्वयं क्रिस्चियन नहीं थे! रोमन लोगो ने उनको सूली पर चढ़ाया था और सौ साल स्वयं के फायदे के लिए रोमन ने ही जीसस के नाम को राजनैतिक हथियार की तरह  इस्तेमाल किया! इसाई धर्म की स्थापना जीसस की मृत्यु के सौ साल बाद उनके जीवन पर लिखे गए विभिन्न gospels/ वृतान्तो को संग्रहीत कर के की गयी थी! सैकड़ो में लिखे गए वृतान्तो में केवल 18 वृतांत चुन कर "ओल्ड टेस्टामेंट"/बाइबिल बनाया गया था! जिन रोमन्स ने जीसस का बेदर्दी से क़त्ल किया आज वह कैथोलिक चर्च खोल के धर्म के ठेकेदार बन बैठे हैं! आखिर क्यों ना हो जिसके पास स्वर्ग की चाभी होगी वही तो दुनिया पर राज करता आया है! 

"सर्व धर्म समभाव" की बात बुद्ध के समय की है जब की इस्लाम और क्रिश्चियनिटी का नामो निशान नहीं था! वैसे भी हिन्दू धर्म में 'धर्म' का मतलब 'मज़हब' या 'religion' नहीं होता है! धर्म का अर्थ सही या  righteous मार्ग होता है जिसमे मानव जाती, पर्यावरण, जीव जंतु, सृष्टि, अंतरिक्ष हर किसी के प्रति मानवीय उत्तरदायित्व की बात की गयी है! 

"सर्व धर्म समभाव" और "वसुधैव कुटुम्बकम" का अर्थ इस देश की संस्कृति के परिपेक्ष में मेरी समझ में ईश्वरवाद और अनीश्वरवाद के सन्दर्भ में किया गया है और दोनों ही विचारधाराओ को मान्यता देते हैं! कोई भी विचारधारा हो और अगर उसका मूल तत्व मानव समाज का भला, उन्नति और उत्थान नहीं है तो वह इस देश के अनुकूल नहीं है! समय के हिसाब से अगर कुछ कुरीतियाँ आ भी गयी है तो हमे उसको अपने आप सुधारना है ना कि उसके गलत अर्थ से सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देना है! मुझे ब्राह्मणों से कोई द्वेष नहीं है परन्तु यदि ब्राह्मण अपनी विद्वता, कर्म और उद्देश्य को छोड़ देता है तो उसको हम कैसे सम्मान दे सकते हैं? बिना किसी विवाद में फंसे मैं सबसे प्रार्थना करूँगा की वह श्री सी गोपालाचार्य द्वारा लिखित 'महाभारत' को पढ़ कर देख लें! जहां पर साफ़ साफ़ लिखा है की ना कोई जन्म से ब्राह्मण है और ना जन्म से शुद्र!

हमारे देश की संस्कृति में अगर हिन्दू विचारधारा को तार तार कर के चर्चा की जा सकती है तो हम इस्लाम क्रिश्चियनिटी कम्युनिज्म साधू संत सोनिया गाँधी मनमोहन सिंह को तार तार करके क्यों नहीं चर्चा कर सकते! जब हम भगवन के अस्तित्व पर प्रश्न उठा सकते हैं तब फिर बाकि सब तो बहुत छोटी मोती चीज़ें हैं!

अंत में इस्लाम के जानने वाले ज्ञाता यह बतायेंगे की खुदा ने गिब्रैल के द्वारा मोहम्मद से क्यों बात करी क्या खुदा मोहम्मद से सीधे बात नहीं कर सकते थे? मुल्ला मौलवी अपने स्वार्थ के लिए इस्लाम को तोड़ने मरोड़ने को आज़ाद क्यों हैं?

Written By: गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव

7 Sep 2013

Soniya Gandhi planning to Loot Indian Temples

रुपये का अवमूल्यन: सोनिया गांधी की साजिश


भारत मे रुपये का अवमूल्यन है नहीं बल्कि सरकार और सोनिया गांधी द्वारा जानबूझ कर किया गया है !

भारत देश जो की 2008-09 की वैश्विक मंदी के समय भी अडिग खड़ा था और पूरा विश्व भारत की तरफ देख कर पैसे लगाने को लालायित था वही भारत देश आज बांग्लादेश से भी आर्थिक रूप से पिछड़ रहा है। आखिर ऐसा क्यूँ?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको अभी से कुछ समय पहले हुई एक बड़ी घटना को जानना होगा। हमारे देश मे बहुत से मंदिर हैं और सभी मंदिर एक से बढ़ कर एक धनी मंदिर हैं। सभी मंदिरों मे अपार सोना, चाँदी, हीरे इत्यादि ना जाने कितने ही दुर्लभ वस्तुएँ रखी हुईं हैं। अभी तक ये सभी बातें सिर्फ किंवदंतियाँ थी, लेकिन जब जुलाई 2011 मे श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का खजाना खुला तो भारत ही नहीं पूरे विश्व की आँखें फटी की फटी रह गईं।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर ना सिर्फ भारत का बल्कि विश्व का सबसे धनी मंदिर बन गया। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के अंदर अकूत सम्पदा खज़ानों मे सालों से पड़ी हुई है। अब जैसे ही श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का धन पूरी दुनिया के सामने आया, पद्मनाभ मंदिर मे पूरा विश्व दिलचस्पी लेने लगा एवं विश्व के कई देशों की नजरें उस मंदिर की सम्पदा पर गड गईं।

अब भारत के मूल्य निर्धारण प्रणाली से श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के अकूत धन का मूल्यनिर्धारण किया गया था, लेकिन चूंकि श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का मे रखी सम्पदा सदियों पुरानी है, अतः अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की ये सम्पदा का मूल्य निर्धारण कोई भी नहीं कर सकता है। ऐसी स्थिति मे श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की इस सम्पदा का मूल्य कोई नहीं आंक सकता है एवं ये अमूल्य है।

ये तो हुई मंदिर की बात और शायद ऐसे खजाने भारत के अधिकांश मंदिरों मे मिलेंगे। 

लेकिन भारत के इस आर्थिक विनाश की कहानी इसी जुलाई 2011 के बाद से हुई। आपको याद होगा की अगस्त क्रांति के नाम पर अन्ना रामलीला मैदान मे अनसन पर बैठे और सोनिया गांधी इलाज कराने के नाम पर अमेरिका गई। उसके बाद से भारत मे प्रायः हर महीने ही तेल के दाम बढ्ने लगे, गैस के दाम बढ्ने लगे, सब्जियों के दाम आसमान पर पहुँच गए, सभी तरफ आर्थिक त्राहि-त्राहि मच गई, जो की भारत मे जो आज तक बदस्तूर जारी है।

इधर जो डॉलर कुछ साल पहले तक 44-45 रुपये था अचानक से बढ़ता हुआ 70 के करीब जा पहुंचा, पाउंड 78 से सीधा 100 के पास पहुँच गया, और भारत के महान अनर्थ-शास्त्रियों जिनमे कोंग्रेसी प्रधानमंत्री मन मौन-हन सिंह भी हैं ने तर्क दिया की चूंकि भारत मे खपत ज्यादा है एवं तेल के दाम बढ़ रहे हैं ऐसे मे रुपये का अवमूल्यन हो रहा है। चलो जी हमने मान लिया फिर एक टुच्चे से देश बांग्लादेश की करेंसी "टका" का अवमूल्यन क्यूँ नहीं हुआ। बल्कि डॉलर के मुक़ाबले बंगलादेशी टका का मूल्य जहां अक्टूबर 2012 मे 84 था आज वो घट कर 77 पर आ गया।

अब ये पूरा घटनाक्रम देखने के बाद एवं अचानक से सरकार के सोने को गिरवी रखने एवं मंदिरों से सोने की मांग करने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है की सोनिया गांधी ने अपने अमेरिकी एवं अन्य विदेशी मालिकों के कहने पर जानबूझ कर रुपये का अवमूल्यन कर मंदिरों मे पड़े अमूल्य खजाने को सोने के नाम पर बाहर निकाल कर बेच देने का है। और इसी कार्य को सही ढंग से करने हेतु अमेरिकी नागरिक को भारत का RBI गवर्नर बना कर लाया गया। आते ही इस अमेरिकी गवर्नर ने भारत के जिन मंदिरों को सोना देने को कहा उनमे से कुछ प्रमुख मंदिर इस प्रकार से हैं : तिरुमाला तिरुपति मंदिर, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, गुरुवायुर के श्री कृष्णा मंदिर, श्री सिद्धिविनायक मंदिर एवं वैष्णोदेवी मंदिर। 

वैसे भी ध्यान देने वाली बात है की सोनिया गांधी की बहन जो मुफ़लिसी मे जिंदगी जी रही थी सोनिया गांधी के भारत आने के बाद एक आलीशान दुकान जहां भारतीय मूर्तियाँ बेची जाती हैं उसकी मालकिन बन बैठी एवं एक भी आयात की हुई मूर्ति की पर्ची उसके यहाँ नहीं मिलती लेकिन फिर भी भारत से मूर्तियाँ सोनिया गांधी की बहन के यहाँ पहुँच जाती है।

ऐसे उदाहरण के पश्चात ये कयास लगाना की भारत मे रुपये का अवमूल्यन जान बुझ कर मंदिरों की सम्पदा को लूटने के लिए गया है, को सही मानने की इच्छा बलवती हो रही है एवं पूर्णतया सच प्रतीत हो रही है।

6 Sep 2013

What if Gujarat become Free Nation



हाल ही में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गुजरात कांग्रेस ने कहा था कि गुजरात के सरदार पटेल ने रजवाड़ों को एक कर अखंड भारत का निर्माण किया था। अब इसी गुजरात को भाजपा अलग देश जैसा बनाने का प्रयास कर रही है। इस बयानबाजी के बाद कितना बवाल मचा होगा, शायद यह बताने की जरूरत नहीं।

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के वेबसाइट www.narendramodi.in पर प्रकाशित एक लेख में एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कुछ ऐसी ही अलग रिपोर्ट पेश की है कि गुजरात अगर देश से अलग हो जाए तो दुनिया में उसका स्थान कहां पर होगा।

लंदन स्थित लिजेट्यूम इंस्टीट्यूट ने इस बाबत एक रिपोर्ट तैयार की है। इंस्टीट्यूट ने इस रिपोर्ट को ‘ग्लोबल प्रॉसपैरिटी इंडेक्स’ नाम दिया है। इसमें दुनिया के देशों और उनके राज्यों के विकास के आंकडों के आधार पर उसका वास्तविक मूल्यांकन किया गया है। इस रिपोर्ट में भारत को भी शामिल किया गया है कि अगर भारत के राज्य भारत से अलग हो जाएं तो उसकी स्थिति क्या होगी। यह रिपोर्ट आप नरेंद्र मोदी की वेबसाइट में भी पढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सोशल कैपिटल के क्षेत्र में गुजरात नंबर-1 है। इतना ही नहीं, अगर गुजरात भारत से अलग होकर अलग देश बन जाए तो वह दुनिया के टॉप-20 अमीर देशों में शुमार हो जाएगा। रिपोर्ट में इसका श्रेय भी "नरेंद्र मोदी" को ही दिया गया है।

रिपोर्ट में दुनिया की 96 प्रतिशत आबादी और 99 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी को आधार बनाया गया है। 142 देशों को शामिल कर तैयार की गई इस रिपोर्ट में कुल 8 कैटेगिरी हैं..अर्थव्यवस्था, शिक्षण, बिजनेस, गर्वनेंस, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था। इन सभी मामलों में भी गुजरात को टॉप पर रखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार अगर गुजरात अलग देश होता तो वह विकसित देशों की सूची में (रिपोर्ट में शामिल किए गए 142 देशों की सूची के अुनसार)15वें नंबर पर आता। इतना ही नहीं, वह यूरोपियन अर्थव्यवस्था के अरबी घोड़ों की तरह पूरी रफ्तार से दौड़ रहा होता।

इतना ही नहीं, गुजरात इस तरह समृद्ध और विकसित होता कि भारत को आंख दिखाने वाला चीन भी उससे बहुत पीछे होता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया के कई देशों को अपनी उंगली पर नचा रहा होता।

रिपोर्ट में गुजरात के दुनिया के विकसित देशों की सूची में 15वां स्थान दिया गया है। जबकि वर्तमान में भारत समृद्ध देशों की सूची में 138वें नंबर पर आता है। सौराष्ट्र की पठारी जमीन पर केमिकल्स, ऑटो पार्ट्स, प्लास्टिक उत्पाद, इलेक्ट्रिकल्स-इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो मोबाइल, शुगर, टेक्सटाइल, डायमंड कटिंग समेत सैकड़ों फैक्टरियों के माध्यम से पैसों की जो फसल गुजरात उगा रहा है, उससे पूरे देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है। जहां देश ऊर्जा के भीषण संकट का सामना कर रहा है, वहीं गुजरात इस मायने में आत्मनिर्भर है।

2005 से 2012 तक इसकी विकास दर 10.1 फीसदी रही है, जो राष्ट्रीय औसत से बहुत ऊपर है। इसी तरह, 1994 से 2000 तक इसकी विकास दर 7.8 फीसदी थी और वह भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर थी।

5 Sep 2013

Congress and AAP fixing exposed


कॉंग्रेस से 3 बार के विधायक नसीब सिंह ने कहा है की आम आदमी पार्टी कॉंग्रेस की ही बी-टीम है और आम आदमी पार्टी कॉंग्रेस ने ही बनाई.

चुनावी सर्वेक्षण के लिए बुलाई गई जनता की मीटिंग मे जहां बीजेपी के डॉ हर्षवर्धन जी, कॉंग्रेस के एमएलए नसीब सिंह और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष शिसोदिया पहुंचे थे। वहाँ ABP न्यूज़ चैनल के पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर नसीब सिंह ने कहा की कॉंग्रेस दिल्ली मे 50 सीटें जीतेगी और इसमे इनके झाड़ू वाले भाई अच्छा काम कर रहे हैं। 

जब कॉंग्रेस के नेता नसीब सिंह ये बात बोल रहे थे तो आप देख सकते हैं की आम आदमी पार्टी के नए नवेले नेता मनीष शिसोदिया के चेहरे पर कितनी बड़ी मुस्कान दिख रही है।

अब इसमे कोई शक नहीं रहा की आम आदमी पार्टी कॉंग्रेस द्वारा ही प्रायोजित एक पार्टी है जो सिर्फ और सिर्फ बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए एवं बीजेपी का वोट काटने के लिए कॉंग्रेस और केजरीवाल के मिली भगत से लिए बनाई गई है।

1 Sep 2013

pratibha visthapan

प्रतिभा विस्थापन

आज लाखों की संख्या मे युवा प्रशासनिक परीक्षा मे बैठते हैं जिनमे से मात्र कुछ ही परीक्षा मे सफल हो पाते हैं। परीक्षा मे सफल हुए परीक्षार्थियों का सरकार देश के पैसे पर सर्वोत्तम उपलब्ध ट्रेनिंग कराती है, जिसमे लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ट्रेनिंग के समय उन परीक्षार्थियों को सरकार वेतन भी देती है।

ट्रेनिंग खत्म होने के उपरांत परीक्षार्थी प्रशासनिक पद पर प्रतिष्ठित होते हैं। उक्त समय मे भी उन प्रशासनिक अधिकारियों के ऊपर देश का बहुत पैसा लगता है। कुछ अधिकारी बड़े ही मनोयोग से देश सेवा कार्य मे लगते हैं और कार्यकाल पूर्ण होने तक देश सेवा करते रहते हैं। पर इन्ही अधिकारियों मे से कुछ अधिकारी देश विरोधी कार्य मसलन लूट-खसोट करने मे लग जाते हैं, चूंकि ये लूट-खसोट का विषय भिन्न है अतः मौजूदा लेख मे उसको शामिल करना यथार्थपरक नहीं है। 

परंतु इन्ही अधिकारियों मे से अधिकारियों की एक जमात ऐसी भी है जो अपना कार्य तब तक चुपचाप करते हैं जब तक VRS लेने का समय नहीं आ जाता है एवं कुछ बड़े रसुखदारों से उनकी गाढ़ी जान पहचान नहीं हो जाती है। इतना होते ही वो सभी प्रशासनिक अधिकारी अपने प्रशासनिक कार्यों को छोड़ मुख्यतया 2 कार्य करते हैं-

1. या तो वो प्रशासनिक अधिकारी  VRS लेने के पश्चात NGO चालू कर देते हैं और अपने रसुखदारों से तथा विदेशों मे स्थित अपने जान पहचान का उपयोग कर पैसे बनाने चालू कर देते हैं एवं मस्त जिंदगी जीते हैं (वैसे इनमे से कुछ अधिकारी अच्छा कार्य भी करते हैं लेकिन उनकी गणना नगण्य समान है)।

2. या फिर वो प्रशासनिक अधिकारी अपना VRS लेने के पश्चात किसी बड़ी निजी कंपनी या विदेशी कंपनी मे चले जाते हैं जहां उनको मोटी तंख्वाह मिलती है।

अब सवाल यहीं उठता है की जिन प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकार देश का इतना पैसा खर्चा करती है देश सेवा हेतु वो अधिकारी एक तय सीमा के पश्चात VRS ले कर पेन्सन तो लेते ही हैं लेकिन देश के पैसे से सीखे हुए चीजों को निजी स्वार्थ मे निजी कंपनी या स्वयं हेतु उपयोग मे लाने लगते हैं।

जब ये VRS लिए हुए अधिकारी सेवा कार्य मे थे तब बहुत सी आंतरिक बातें इनके पास होती हैं जिसे किसी को नहीं जानना चाहिए होता है, परंतु क्या जो निजी कंपनी इनको लाखो-करोड़ो रुपये वेतन के रूप मे या NGO मे चंदे के रूप मे देती वो कंपनी इनसे वो सभी राज नहीं जानेगी या फिर इसकी क्या गारंटी है की ये सभी विशिष्ट सेवा निवृत पूर्व अधिकारी वो सभी बातें उक्त निजी कंपनी या कंपनियों को नहीं बताएँगे या फिर जिस ट्रेनिग को इन अधिकारियों को देने के लिए सरकार लाखो करोड़ रुपये खर्च करती है उसको महज चंद सिक्कों मे दूसरी कंपनी को नहीं देंगे।

क्या ये निकृष्ट कार्य देशद्रोह नहीं है? क्यूँ बढ़ रही है प्रशासनिक अधिकारियों के बीच VRS लेने की प्रवृत्ति ? क्या VRS ले कर उक्त सभी प्रशासनिक अधिकारी देश की आम जनता के पैसे के साथ-साथ जनभावना के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं ? क्या ये अधिकारियों के द्वारा पैसे की चमक मे मंत्रमुग्ध हो देश के प्रति अपने कर्तव्यों को भूल जाना एक क्षम्य अपराध है ? क्या इन अव्यवस्थाओं की जांच पड़ताल तथा रोकथाम हेतु केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिल कर समीक्षा नहीं करना चाहिए ?

इस प्रतिभा पलायन को रोक कर प्रशासनिक अधिकारी अपने देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें एवं उन कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करें, ऐसा मैं सभी प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध करना चाहूँगा !