28 Dec 2012

Indian Youth and Complications



वर्तमान चुनौतियाँ और युवा





चुनौतियाँ होती क्या हैं? चुनौतियाँ आती कहाँ से हैं और उनका परिणाम क्या होता है?

चुनौतियाँ हमारे आज की परिस्थितियों पर आधारित होती हैं और जो परिश्थितियों से लड़ना नहीं जानता या लड़ नहीं पता है वो मिट जाता है| आज भी कमोबेश हमारे इस महान भारत देश में परिस्थितियों ने ऐसी चुनौतियों को जन्म दे दिया है की वो भारत को अन्दर से खोखला किये जा रही हैं| कह सकते हैं की "चहूँ ओर फैला है अन्धकार. लूट रही है इज्जत सरे आम"|

आज हम सभी देख रहे हैं की हमारे देश की हालत क्या बन चुकी है| चारो तरफ अराजकता का माहौल है| कही किसी को मार दिया गया तो कही किसी छोटी बच्ची का बलात्कार और उसकी हत्या तो कही सरे आम लूट मची है| आखिर ऐसा संभव हो कैसे हो रहा है?

अब जरा विस्तार से हम आज की परिस्थितियों को देखने की कोशिस करते हैं|

क्या आपको पता है की हमारे देश में कितने बड़े-बड़े घोटाले हुए अभी हाल के दिनों में? कामनवेल्थ घोटाला, २जि घोटाला, कोयला घोटाला और भी पता नहीं कौन कौन से घोटाले| पर क्या होता है वही लोग चुनाव में खड़े होते हैं और कुछ लालच दे देते हैं चुनाव के समय जैसे की लैपटॉप देंगे तो बेरोजगारी भत्ता देंगे पर होता क्या है---मिलता तो कुछ नहीं पर कोरे आश्वासन के चलते गलत लोग जीत कर चले आते हैं हमारे ऊपर राज करने| और ये संभव होता कैसे हैं, हमारे में से कुछ युवा जो या तो वोट देने जाते नहीं हैं या अगर जाते भी हैं तो उन्ही गलत ठेकेदारों को चुन लेते हैं|

इससे भी बढ़ कर बात होती है की आज का युवा केवल सिनेमा और लड़कियों के पीछे ही लगा रहता है| आज के युवा का रोल मॉडल होता कौन है? आज का युवा वर्ग केवल किसी हिरोइन का सपना देख रहा है या कुछ देशद्रोह का कार्य करने वाले लोगो को अपना हीरो मान कर चलते रह रहे हैं| शारीर तो बनायेंगे सलमान खान जैसे पर उस शारीर का उपयोग क्या होता है, केवल मटरगस्ती करके झूठी शान को दिखाना| फसबूक पर आते हैं लेकिन देश में क्या चल रहा है इसकी कोई खबर नहीं होती है| अपना मौज मस्ती का ग्रुप ढुंढते हैं और वहां किसी लड़की की प्रोफाइल जिसके पीछे कोई विकृत मानसिकता का लड़का भले क्यों न बैठा हो उसके केवल हाई लिख देने मात्र से पागलों की तरह कमेन्ट मारने में लग जाते हैं और इसी में पता नहीं क्या क्या सपने सजा लेते हैं|

कितने युवा अपने पिता से पिछली दो पीढ़ी का भी नाम बता सकते हैं| नहीं बता सकते हैं क्युकी उन्हें मतलब नहीं है अपने पुरखो को जानने का| जब अपने २ पीढ़ी का नाम नहीं पता तो अपने शहीद वीर पुरखों की गौरवशाली वीर गाथा कैसे याद रहेगी| अपना इतिहास नहीं पता तो देश का इतिहास कहाँ से पता रहेगा|

आज का युवा जब महंगाई आती है तो चिल्ला सकता है लेकिन वोट डालने के समय क्या करता है शायद आप सभी को खुद ही पता होगा| न पता हो तो एक बात अपनी अंतरात्मा से पूछिए|

आज का युवा केवल पाश्चात्य सभ्यता का अनुशरण करने में लगा है वो भी अंधानुसरण| ये तो होना ही था क्युकी खुद का इतिहास नहीं पता है की भारत क्या था? आज वही पाश्चात्य सभ्यता के देश हमारे देश के तरफ आस लगाये बैठे हैं| हमारे वेदों और ग्रंथो को पढ़ कर एक-एक चीज इजाद करते हैं और हम क्या करते हैं बस उनको वो चीजें इजाद होते हुए देखते मात्र रह जाते हैं लेकिन उन चीजों को ईजाद करने का जज्बा नहीं रखते हैं| बातें तो इतनी बड़ी-बड़ी करते हैं की बस एवरेस्ट उखाड़ कर अपने छत पर सजाने वाले हैं। लेकिन बस बातें ही हैं और कुछ नहीं। इसी मे जो युवा कुछ करते हैं वो पुराने ख्यालों के बिगड़े हुए युवा कहे जाते हैं।

युवाओं से अपील है की कृपया अपने सोच को बदलें क्यूंकी जब तक आपकी सोच नहीं बदलेगी तब तक आप यूंही शोषित होते रहेंगे। कल को आप गुलामी की जिंदगी भी जिये तो बुरा ना मानिएगा क्यूंकी मौजूदा हालात के हिसाब से ये संभव है। क्यूंकी आप अपनी शक्ति को भूल चुके हैं। सबसे पहले सारे युवा अपनी शक्ति को पहचानें सभी चीजें आसान हो जाएंगी।

मत भूलो की भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, खुदी राम बोस और सबसे अहम युवाओं के प्रेरणा श्रोत स्वामी विवेकानन्द जी भी युवा ही थे और देश की सोच कर चले और देश को हमेसा आगे रखा हमारे जैसा यूंही बैठे नहीं रहे। सोचो अगर ये लोग बैठे होते हमारे जैसे और किसी हसीना के ख्वाब मे डूबे रहते तो आज भी हम किसी अंग्रेज़ के घर पर चप्पलें साफ कर रहे होते या उनकी जूठन उठा रहे होते।

आगे आप सभी पढे-लिखे समझदार हैं ! ! !



24 Dec 2012

A Girl : Return My Pride


मेरी लाज वापस करो ...



चले थे वो देश बदलने 
खुद बदल कर आ गए 
देश सेवा का भाव था मन में 
मेवा देख कर ललचा गए 
बीवी थी बेटी भी थी घर में 
दूसरों के घर में पत्थर मार गए 
घायल हुई जब पत्थर से लड़की 
उसकी अर्थी सजा कर वो आ गए 
पूछा जब गया उनसे अर्थी का 
पीठ दिखा वो वहां से भाग गए 
अर्थी भी रखी है लड़की भी वहीँ है 
उठाने वाले जाने कहाँ चले गए 
चिता सजी हुई है लड़की मरी हुई है 
जलाने वाले जाने कहाँ मर गए 
अरे जब गए थे तुम देश सेवा को 
मेवा का प्यार जगा कहाँ से लिया था 
मेवा का प्यार गर जगाया भी तुमने 
बेच दिया होता अपनी बेटी को 
बहु को न उतारा होता बाजार में 
काहें देश का सौदा करके चले आए 
आज रो रहा सारा देश कारण तुम हो 
गर दिखाई होती सच्चाई थोड़ी सी भी 
गर होती गैरत तुम में थोड़ी सी भी 
होता देश धनवान हर लड़की दुर्गा आज होती 
पूजी जाती लड़की इस देश में हर घर में 
तुमने तो हर घर को शमसान बना दिया है 
अब हर घर में मुर्दे सोते हैं हँसते और रोते हैं 
पर वो मुर्दे न कुछ बोलते न कुछ करते हैं 
कैसी विडम्बना है ये कैसा अभिशाप है 
यहाँ तो तुम्हारे कारण हर जेब में सांप है 
कर सकते हो अब भी कुछ अगर तुम 
दिलाओ मेरी लाज मेरा अभिमान तुम 



Girl Child A Curse


लड़की : इक अभिशाप 


घर में आई एक खुशहाली 
घर की दुल्हन हुई पेट से 
घर में थे सभी जन खुश 
घर में आएगा एक बच्चा 
खेलेंगे सभी साथ में उसके 
घर भर गया खिलौनों से 
चाचा खुश मामा खुश 
दादा और दादी भी थे खुश
बुआ बाँट रही मिठाई थी  
पापा बनने का अहसास 
था बड़ा ही प्यारा उनको 
उसी समय गिरी इक बिजली 
किसी ने दी इक राय ऐसी 
करा लो गर्भ निरिक्षण 
दादा ने कहा पापा ने भी 
दादी तो अड़ गईं इस पर
बुआ ने तो मारी लात थी 
फिर ले कर जाया गया 
दुल्हन को क्लिनिक 
दे कर पैसा क्लिनिक को 
हुआ जाँच गर्भ का वहां 
रिपोर्ट देख सभी यूँ हुए चुप 
जैसे सबको मार गया लकवा 
गर्भ में थी लड़की पलती हुई 
लेकिन निकल गया था समय 
दुल्हन के गर्भ को गिराने का 
कितना भी दिया पैसे का लालच 
लेकिन था जान का खतरा 
फिर कुछ समय बाद पैदा हुई 
बड़ी सुन्दर एक लड़की घर में 
घर में था मातम पसरा हुआ 
धीरे धीरे लड़की हुई बड़ी 
कोई ध्यान देता नहीं था उस पर 
खुद ही तैयार हो जाती स्कुल थी 
8 साल में चूल्हे की मिली जिम्मेदारी 
बच्ची की आँखे हुई लाल आंसू से 
लेकिन फिक्र थी किसको वहां 
लड़की हुई बड़ी लड़ कर गई कॉलेज 
सड़क पर करते थे परेसान सभी 
अचानक एक दिन हुआ कुछ भयानक 
लड़की को उठा ले गए सड़क के लोग 
किया उसका बलात्कार सबने मिल कर 
फेंक गए उसको बिच सड़क पर 
काली रात थी वो बहुत ही सर्द 
लड़की के घर पर गिरी बिजली फिर 
पुलिस ने कर दिया मना केस लिखने से 
जब दिया दबाव जवाब मिला लाठी 
रोते बिलखते हुए परिजन घूमते रहे 
पुलिस वहां खड़ी पैसे गिन रही थी 
जो लिए उसने बलात्कारियों से थे 
अब पीड़ित लड़की थी बिस्तर पर 
बलात्कारी भी तो थे बिस्तर पर ही 
फर्क सिर्फ इतना था दोनों बिस्तरों में 
लड़की थी अस्पताल के बिस्तर पर 
बलात्कारी थे बलात्कार के बिस्तर पर 
दूसरी लड़की को बनाने शिकार अपना 
सरकार के कान पर थी रुई बंधी हुई 
आंख में था मिर्चा पड़ा हुआ उसके 
हाथ थे पीछे बंधे हुए उनके 
और बिता कुछ दिन ऐसे ही 
सारे अस्पताल में थीं बलात्कार 
से मर रही निरीह बच्चियां 
बलात्कारी फैले थे सड़कों पर 
अपने अगले शिकार को पाने 



22 Dec 2012

One Indian Soldier's views on Congress and Gandhi Family


वाह जी वाह ये भी खूब रही

आज एक फौजी से बात हो रही थी और उनकी बातें सुन कर यही लगा की गुलामी अभी तक ख़तम नहीं हुई है देश से।

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फौजी महानुभाव ने कहा की गाँधी परिवार ने इतने बलिदान दिए तो उनका ही राज रहेगा देश में कोई उनको हिला नहीं सकता है देश से। मैंने पुछा की कौन सा बलिदान गाँधी परिवार के किस गाँधी ने दिया?

नेहरु गुलामी के समय भी ऐय्यास, इंदिरा ने आतंकियों को आगे बढाया और उसमे मरी, राजीव के कहने ही क्या और अभी सोनिया की नंगई सभी के सामने है। जनाब सुनने को तैयार नहीं थे। मैंने कहा की फौजी हो और पाकिस्तान अधिनस्थ कश्मीर किसने थाली में सजा कर दिया वो तो नेहरु ही था न। तो जनाब कहने लगे की कारगिल को देखो। मैंने कहा की मैं तो मूल को देख रहा हूँ लेकिन नहीं। पहले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, फिर अक्शाई चीन, फिर बांग्लादेश में दिए गए जमीन, और अब सर क्रिक का जमीन दिया जा रहा है पाकिस्तान को। इतना सुनते ही इन जनाब ने बात बदल दिया।

तब एक फौजी हो कर जनाब कह रहे हैं की अन्ना के अनसन के समय सुषमा कैसे नाच रही थी जैसे की कोई कोठे वाली नाच रही हो, मैं तो शर्मिंदा हो कर निकल गया।




मैंने कहा की एक फौजी हो क्या आपके फ़ौज में देशभक्ति के गानों पर नाचना होता है या नहीं तो कहा की होता है। मैंने कहा की क्या वो काम कोठे वाला होता है या फ़ौज ने अब ये कह दिया है की देशभक्ति के गानों पर नाचना कोठे पर नाचने के समान है।

तभी मैंने अपने तरफ से कहा की वैसे सोनिया और शिला तो बार में चलने वाले गानों पर डांस करती रहती है चाहे वो छिछोरा हनी सिंह का गाना हो तो उन जनाब ने जवाब दिया की वो दोनों तो कैबिनेट में हैं और गाँधी परिवार से हैं तो कुछ भी कर सकती है उनको हक़ है।

वैसे इन महानुभाव को चिढ है मोदी जी से क्यूंकि ये सेक्युलर फौजी हैं न केवल बुखारी और गाँधी परिवार के तलवे चाटेंगे और अपनी बहु-बेटियों को उनको परोसेंगे। कह रहे थे की गुजरात से आतंकी पुरे देश में घुस कर आतंक फैला रहे हैं। और मोदी अपना जेब भर रहे हैं क्यूंकि रंडवे हैं लेकिन ये किसके लिए इतना इकठ्ठा कर रहा है मोदी। मैंने कहा की सैलरी तो वो 12,000 ही लेते हैं मोदी जी जो शायद आपसे भी कम है तो कह रहे हैं की इतने कंपनियों को अपने यहाँ बुला रखा है वो किसके लिए। मैंने जवाब दिया की वो तो गुजरात के लिए तो जवाब आया की हाँ जी हाँ जैसे हमें पता ही नहीं।

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ये मानसिकता ही है जो हमें आज भी गुलाम बनाये हुए है। अगर ऐसे हैं हमारे फौजी तो हो गया देश का कल्याण।

वैसे इनकी बेटी मेरी दोस्त है और इस पोस्ट के बाद शायद दोस्ती ख़तम भी कर दे परन्तु मुझे परवाह नहीं। जो गलत है वो मेरे लिए हमेसा गलत रहेगा फिर चाहे वो करने वाला कोई भी हो।



21 Dec 2012

History of Hindus after 50 years

50 साल बाद कुछ इस प्रकार लिखा जायेगा हिन्दुओं का इतिहास



यदि इस देश का हिन्दू अब भी नहीं जगा तो 50 साल बाद कुछ इस प्रकार लिखा जायेगा हिन्दुओं का इतिहास :


कभी इस देश का नाम भारत हुआ करता था, फिर भारत से बदल कर हिंदुस्तान हुआ, अब दोनों भारत और हिंदुस्तान को हम भारतवाशियों ने ख़तम कर बना दिया उसे इंडिया। इस देश में विदेशी आतताइयों के निरंतर  हुए। यहाँ के हिन्दू शासक ताकतवर और साहसी तो जरुर थे परन्तु उनकी आपस में ही फुट थी। धार्मिक कायरता थी इस लिए भारत के हिन्दू शासक विदेशी आतताइयों से हार गए।

यहाँ की औरतें, खाना, जमीन और मौसम बहुत अच्छा था (आज भी अहि) जिस वजह से भारत की ये पावन धरा हमारी वसुंधरा विदेशियों को भा गई। धीरे-धीरे उन विदेशियों का राज हो गया। उनकी संख्या बढती गई। फिर इक और विदेशी कौम आई हमारी इस पावन धरा को कलुषित करने वो थी अंग्रेज। इस अंग्रेज कौम ने हमारे फूट का फायदा उठा यहाँ इसाई कौम को फैलाया तथा अंत में जाते-जाते इस देश के तीन टुकड़े करके थमा दिए हमें एक सोने की थाली में सजा कर और देखो हमने क्या किया उनकी सोने की थाली में दिए हुए विष को भी अमृत समझ कर ख़ुशी-ख़ुशी पी लिया और बड़े आराम से बैठ गए दोनों कोनों पर और इसको और टुकड़ों में बाँटने के काम में मनोयोग से लग गए।

अब क्या कहें की इस देश का हिन्दू महाबेवकुफ़ था या है जो इन आतताइयों को अपना हितैषी और भाई मानता रहा। इसमें इनके कुकर्मों को आसान करने हेतु और भी कई लोग कंधे से कन्धा मिला कर देश को पतन के मार्ग पर चलने के लिए आ गए इनमे प्रमुख थे बहुतों के महाश्रद्ध्येय गाँधी और नेहरु। ये दोनों महाशय देशी वस्तु के उपयोग को बढ़ावा देने की बात तो करते थे परन्तु खुद विदेशी वस्तु को गले में लटकाए घूमते रहे जिसे आज पूरा भारत भुगत रहा है। जी हाँ आपने सही सुना विदेशी वस्तु का गाँधी-नेहरु के द्वारा पूर्ण मनोयोग से उपयोग जीवनपर्यंत। ये विदेशी वास्तु कोई और नहीं कांग्रेस है जिसे "एओ ह्युम" ने बनाई जो खुद एक अंग्रेज था। वैसे नेहरु को तो और भी विदेशी वस्तुओं से कुछ खास प्यार था जैसे की एडविना और जहाँ तक सुना जाता है इनके कपडे पेरिस से आते थे और धुलने को भी पेरिस ही जाते थे परन्तु ये देशी वस्तुओं के परिचायक थे।

हाँ इन्होने देशी वस्तुओं के प्यार में एक कार्य किया की विदेशी वास्तु कांग्रेस को भारत पर थोपने के बाद देशी संगठन "आरएसएस" को देश के लिए खतरा घोषित कर दिया परन्तु जब भी देश पर कोई संकट आया जैसे की भारत-पाक युद्ध या भारत-चीन युद्ध तब इसी "आरएसएस" के धुर विरोधी नेहरु "आरएसएस" के गणवेश में पथसंचलन तथा अधिवेशन में भाग लेते हुए पाए गए। ये एक मौकापरस्ती और चाटुकारिता नहीं थी तो और क्या थी। क्यूंकि आप पीठ पिछे तो इसी संगठन को देश के लिए खतरा बता रहे हैं और देश पर खतरा आने पर इसी संगठन के आँचल में अपना सर छुपाने तथा देश की सम्प्रभुता तथा आतंरिक सुरक्षा की व्यवस्था सौंप आये। आपका मकसद क्या था इसमें पहले तो इस देशभक्त और देशी संगठन को बदनाम कर दो फिर इसको अपने स्वार्थ में उपयोग भी करते रहो क्यूंकि ये "आरएसएस" के लोग तो सीधे और सच्चे इन्सान थे जो देशहित की ही सोचते थे।

फिर आई बारी जाँत-पात की जिसे नेहरु जी आपने अपने झूठे जनेउ जो आप केवल चुनाव के वक्त धारण करते थे ताकि जनेउ दिखा कर आप वोट पा सकें खुद को पंडित दिखा कर। फिर इस जाँत-पात को बढ़ाने के बाद बारी आई झूठी धर्मनिरपेक्षता की जिसे इंदिरा ने बुखारी और जनता दल से हारने के बाद अल्पसंख्यक जिनको जम कर कटवाया इनकी पार्टी ने उनको अपने साथ मिला उनका दोहन करने के नाम पर लागु करवा दिया ताकि  इनके कुकर्म अबाध गति से चलतें रहे।

इसी बिच गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों का दोहन कर उच्चस्थ पदासीन लोगों को खरीदने हेतु आरक्षण नाम का भूत छोड़ दिया गया लोगों के पीछे। इसी धर्मनिरपेक्षता और आरक्षण के नाम पर मुल्लायम और दिग्विजय जैसे लोगों ने खुद को धर्मनिरपेक्ष और आरक्षण प्रणेता बताने के चक्कर में इनको इस पद तक पहुँचाने वाले हिन्दुओं को ही बिसरा दिया लेकिन बेचारे हिन्दू आज तक इस बात को समझ नहीं आये और उलझे हुए हैं दलित, पंडित, राजपूत इत्यादि जातियों में और ये लोग मलाई काटे जा रहे हैं हम हिन्दुओं के छातियों पर चढ़ कर।

हाँ इन छद्म धर्मनिर्पेक्षियों का सबसे बड़ा कार्य ये था की "आरएसएस" नाम के संगठन को गाली देते रहो और उनको गलत ठहराते रहो ताकि लोग इनसे नफरत करने लगें और इनके संगठन में जुड़ने से बचते रहें ताकि इनकी दुकान निर्बाध रूप से चलती रहे। इसी बिच आई इनकी मददगार महिला जो पता नहीं क्या थी शादी से पहले और शादी से पहले प्यार के किस्से तो बहुत ही सुनने को मिलते रहते हैं साथ ही बहुत से आरोपियों को अपने घर में 7 सालों तक छुपाये रखना ऐसी महिला सोनिया गाँधी जी इंडिया में पधारीं। इन महिला के आते ही भारत को इंडिया बनाने और धर्मपरिवर्तन कराने का कार्य तथा दलाली और कालाबाजारी का धंधा बड़े ही जोर-शोर से चालू हो गया।

इन सबके बिच खुलेआम लव जिहाद के नाम पर हिन्दू लड़कियों को बरगलाया जाने लगा लेकिन प्रशासन चुप था और है साथ ही हिन्दू भी चुप है क्यूंकि हिन्दू की लड़कियां बरगला कर मुसलमान बनाई जाने लगी थीं। मजारों, फकीरों और चर्चों को कुछ ज्यादा ही प्रचलित किया जाने लगा देश में और हिन्दुओं में ऐसी भावना जगाई जाने लगी की इन जगहों पर उन्हें शांति मिल सकती है उनके धर्मिकस्थल तो बिना काम के हैं लेकिन इतने पर भी हिन्दू चुप रहा।

हिन्दुओं के साधू-संत भी आपसी फूट तथा लालच में अपने मठ तथा मंदिरों में ही पदासीन रहे उससे बाहर निकल अपने हिन्दू भाइयों की सुध लेने का शायद विचार तक अपने मन-मंदिर में नहीं आने दिया। क्यूंकि शायद उनको चढ़ावे और अपने मठ से लगाव रहा। लेकिन इस फूट का फायदा हुआ किसे चर्च और मदरसों को अपनी अनियंत्रित गतिविधियों में लगे रहे तथा पुरे हिन्द देश में चुन-चुन कर मारते रहे और साधू-संत अपने मठों में बैठ धूनी रमाते रहे लेकिन मठ के बाहर कदम नहीं निकाले ताकि उनके पद कोई और न बैठ जाए।

आज हमने इस देश को चार टुकडों में बाँट लिया है। हर शहर में इक चिड़ियाघर बनाया जिसमे हिन्दुओं को कुछ सैम्पल जानवरों के साथ रखे हैं हिन्दुओं को ही कंकण-पत्थर मारने के लिए। ये चिड़ियाघर में बंद हिन्दू ही उनकी औरतों को सताने के लिए दूर-दूर से इन जानवरों के मनोरंजन के खेलों में भाग लेने के लिए जबरदस्ती पकड़ लायी गई हिन्दू महिलाओं और लड़कियों के चीत्कारों को सुन ताली बजाते रहे और आज भी बदस्तूर बजा रहे हैं शायद उन हिन्दू औरतों की चीत्कारों से उन जानवरों से ज्यादा इन छद्म हिन्दू पाखंडियों को मजा आता है।

जिन जानवरों ने भारत को हिन्दुस्तान तथा फिर कब्रिस्तान बनाया वो तो हमारे बिच नहीं रहे परन्तु शायद उनके हरम में कैद हमारी हिन्दू बहनों के कोख से पैदा हुए इन्सान तो नहीं बन पाए अलबत्ता उसी जानवर योनि को ह्रदय से लगा हरम के व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए छद्म हिन्दू पाखंडियों को अपने हरम में सबसे पहले मिला लिया और फिर से अपना जानवर-राज कायम करने के राह पर चल निकले। अब भाई हिन्दू कोख से पैदा हो जानवरों से मिलोगे तो ऐसा ही होगा वो तुम्हरे घरों में घुस तुम्हारी बहु-बेटियों की दावत उड़ायेंगे और अपनी बहु-बेटियों के चीत्कारों को कमरे के बाहर बैठ सुन कर तुम ताली बजाना लेकिन ये सिलसिला टूटे और एक नया सवेरा इस पावन धरा को चूमे ऐसा कोई कर्म न करना।

रुद्राक्ष को पहनना सांप्रदायिक दिख गया लेकिन गंदे जगह के बाल की ताबीज और क्रोस पहनना शांति का प्रतिक बन बैठा। साड़ियों को पहनना बहन जी टाईप हो गया और बदन उघाडू परिधान आधुनिकता का द्योतक बन गया। शादी उपरांत पति या पत्नी के साथ घूमना मज़बूरी और शादी से पहले माँ-बाप को धोखा दे अपनी प्रेयसी या प्रेमी के संग अठखेलियाँ करना सभ्यता बन गया। महाराणा प्रताप, लक्ष्मीबाई और सुभाष चन्द्र बोस आतंकी बन गए परन्तु हिन्दुओं को ही काट कर उनके सर से मीनार बनाने वाले अकबर, औरंगजेब इत्यादि फ़क़ीर और रहनुमा बन गए और तो और जब फ़िल्मी हस्तियाँ हमारे पुस्तकों में स्थान पाने लगीं तो हमें ऐसा ही दूषित परिवेश मिलना तथ्यपरक लगता है।

ऐसे अंधों से एक निवेदन करना चाहूँगा मैं की अपने घर की महिलाओं और बेटियों का चेहरा देख समय रहते मुख्यधारा अपने मूल के तरफ लौट आओ कहीं देर न हो जाए और तुम केवल ताली बजाते रह जाओ।




19 Dec 2012

121 Crore Indians are responsible for any RAPE in India

सारी 121 करोड़ की भारतीय जनता है बलात्कारी 



भारत में अगर किसी भी लड़की के साथ बलात्कार होता है तो उसका बलात्कार केवल बलात्कार करने वाला या वाले इन्सान नहीं करते हैं बल्कि उस लड़की का बलात्कार पुरे भारत की 121 करोड़ जनता एक साथ मिल कर करती है 

बलात्कार जैसी घटना की जमीन हम सभी ही मिल कर बनाते हैं 
जब बलात्कारी बलात्कार के बाद छुपता है तो हम ही छुपाते हैं 
जब बलात्कारी अपने पैसे के बल पर बाहर आता है तो उसको खाने पर बुलाते हैं 
जब बलात्कारी अपने वकील और पैसे के बल पर बरी हो जाता है तो हम उसको लड्डू खिलाते हैं जबकि सच्चाई पता होती है हमें 
जब बलात्कार की शिकार लड़की मर जाती है तो हम 2 मिनट का मौन रख फिर से निकल पड़ते हैं अगले शिकार की खोज में 
जब बलात्कार की शिकार लड़की के परिवार वाले मर जाते हैं तो हम दारू और मुर्गे के साथ किसी और परिवार की लड़की को दबोच लाते हैं 
अगर लड़की बच जाती है अपनी दृढ-इक्षाशक्ति से तो हम ही आगे आते हैं और उसको बार-बार उस वाकिये को याद दिला-दिला कर उसका हर क्षण बलात्कार करते हैं 
हम ही हैं की अपनी लड़की को घर में सुरक्षित रखने का ढोंग करके हर दूसरी लड़की के ऊपर गन्दी नजर रखते हैं 
हम ही हैं जो घर में अश्लील फिल्मे बड़े चाव से देखते और दिखाते हैं ताकि आने वाले समय का बलात्कारी हमारे घर में पले-बढे 
हम ही हैं जो पडोसी के घर में ताक-झाँक में लगे रहते हैं की उसकी बेटी ने आज क्या-क्या पहना है 
किसी भी लड़की को ऐसे घूरते हैं की वो घर पहुंचते-पहुंचते गर्भवती हो जाए 

आधुनिकता के नाम पर नंगेपन तथा मलेक्षपने की तरफ अग्रसर हैं हम 

और भी बहुत कुछ है कितना कहूँ, हाँ इतना जरुर कहूँगा की आज हर घर में एक बलात्कारी है फिर चाहे वो पुरुष हो, नारी हो या अर्धनारी हो।

अब आगे क्या करना है हम खुद को जांचने के बाद सोचें और करें उन कार्यों को नहीं तो एक पुड़िया जहर तो सभी खरीद कर रख ही सकते हैं अपने पास में और जहर कब खाना है इतना तो समझ आएगा ही तो खा लेना।



18 Dec 2012

Delhi the Rape Capital of India


दिल्ली में हुआ लड़की का गैंग रेप



यहाँ लड़की का गैंग रेप नहीं हुआ बल्कि ये पुरे भारत का सामूहिक बलात्कार था जो किसी और ने नहीं बल्कि देश के कर्णधार और सुरक्षा को पैबंद लोगों ने किया। पुरे भारत का बलात्कार करने वाले हमारे नेता जो अपना वेतन बढाने में ही सोचते रहते हैं या कैसे लूट कर सकें इसमें लगे रहते हैं और जो समय बचता है उसमे ये लोग आम जनता को कैसे चुप करा सकें इस कानून को बनाने में लगे रहते हैं काश ये आम जनता की सुरक्षा के लिए भी थोडा सोचे होते।

आदमी तो आदमी यहाँ जो औरते हैं लोक सभा या राज्य सभा या दिल्ली प्रदेश की मुखिया शिला दीक्षित महिलाओं को ही नसीहत देती रहीं। महिलाओं को दी गई नसीहत की बात ही क्या कहें जब शिला दीक्षित अपराधियों को अपने गोद में बैठा कर पुलिस महकमे को अपने पैरों के निचे रखती हैं। कहीं ऐसा तो नहीं की यहाँ का पुलिस महकमा या कहें तो दिल्ली पुलिस के उच्चस्थ पदासीन व्यक्ति ही अपराधियों को सह दे रहा है क्यूंकि शायद अपराधी और उन अपराधियों की अम्मी इसके मुंह में इसके औकात की कीमत ठूंस रही हैं। अगर पुलिस प्रशासन दिल्ली में होता तो कोई मंदिर से भीखारी के कटोरे से एक सिक्का तक नहीं चुरा सकता है।

या शायद पाश्चात्य सभ्यता के लिए मर रही पाश्चात्य महिला जो देश में कुछ भी करके देश को टुकड़ों में विभाजित करने में लगी है लोगों के सोच को इतना कलुषित कर देना चाहती है की देश में कोई परिवार शांति से न रह सके।

जैसे शिला दीक्षित महिलाओं को नसीहत दे रही थी की ऐसे कपडे मत पहनो वैसे मत रहो ये मत करो, अबे बुड्ढी जिस दिन तेरी बेटी अर्धनग्न और नशे की हालत में बेहोश हो बार से निकलती थी तब तो तेरे पाले हुए बॉडी गार्ड रहते थे तो तू क्या समझेगी एक महिला की व्यथा। और जो समय तू ये सलाह देने में बिता रही थी उस समय में तू अगर अपराधियों पर पाबन्दी लगाने में बिताती तो दिल्ली और दिल्ली की महिलाओं की ऐसी स्थिति नहीं होती। क्यूंकि यहाँ महिलाएं तो महिलाएं नवजात नासमझ बच्चियां तक भी शिकार बन रही हैं। अब तू क्या चाहती है शिला दीक्षित की महिलाएं तेरी बेटी की दिन में बुर्के में रहें और रात को................

इसके बाद अब पुलिस को कहने को कुछ बचता ही कहाँ है ये तो ढक्कन की औलादें हैं जो अपने अपराधी बापों के गोद में बैठ अपनी बेटी और बहन का सौदा करते रहने में व्यस्त रहते हैं।

अब जब दिल्ली जो की देश की राजधानी होने के साथ-साथ एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति रखती है उसका ये हाल है तो देश के दुसरे हिस्से और सुदूर के गांवों में क्या हाल होगा। जब देश की राजधानी ही सुरक्षित नहीं है तो देश के गाँव कितने सुरक्षित होंगे ये समझा जा सकता है।

और कहाँ मर गया ये महिला आयोग ? कोई जवाब नहीं आया इनका और नाही इनकी कोई प्रतिक्रिया ? क्या ये महिला आयोग बलात्कार के केसों को मनोरमा कहानियों के किस्सों की तरह चाय की चुश्की की साथ पढ़ कर ठहाके लगाती हैं और अपने बारी का इन्तेजार करती हैं की काश ऐसा मजा इनको कब मिलेगा आखिर।

अब तो इस देश को राम ही राखें ! ! !

17 Dec 2012

सीने में इक ज्वाला जाने कब से धधक रही है ! ! !





सीने में इक ज्वाला जाने कब से धधक रही है,
ज्वालामुखी सी बाहर आने को कब से तड़प रही है,
अब तो बस सोचते हैं, काश वो पल कब आएगा,
जब इटली, रोम और पोप भी भागवामय हो जायेगा ।। 

भागते क्यूँ हो तुम इन गद्दार आतताइयों से,
इक बार तो वही पुरानी रणभेरी फूंको तुम,
जो फूंकी थी कभी राणा, लक्ष्मी और सुभाष ने,
फिर देखो कैसे पूंछ सटकाता ये पाकिस्तान है ।।

बात कभी न करना तुम इस कायर सेक्युलरता की,
कोई नहीं है यहाँ जो सोचता सर्व धर्म समभाव की,
सब मनगढ़ंत बाते हैं जिनको बोया निज-स्वार्थ में,
उठ गया पर्दा अब गाँधी नेहरु इंदिरा के "काम" से ।।

सब कुचलना तुम्हे चाहते हैं क्यूँ समझते नहीं हो तुम,
मिल कर सभी मिटाना तुम्हे चाहते हैं इस पावन धरा से,
रोटी चबा कर तुम्हारी ही हाथ मिलाया सबने है आपस में,
फिर चाहे वो हो बांग्लादेश या फिर हो वो अफगानिस्तान ।।




तप भंग करें किसका प्रश्न ये जटिल है ? ? ?



देखो सुकोमल अप्सराएँ क्षुब्ध हो रही हैं 
पावन इस धरा पर इनसी रूपसी अनेक हैं 
तप भंग करें किसका प्रश्न ये जटिल है 
यहाँ तो सब सूरा-सुंदरी में व्यस्त-मदमस्त हैं 
बढ़ रही है असुरों की सेना सो गया विवेक है 
वशिष्ट दधिची सा ऋषि आज निष्क्रिय है 
हो रहा अब तो पापियों का राज्याभिषेक है 
इंद्र पद पाने की बात तो हम छोड़ ही देते हैं  
देवाधिदेव पद की प्राप्ति भी हुई कितनी सरल है 
फेंके जो तुम बोटी देखो कितने खुलते धोती हैं 
चहुँ ओर फैला आधुनिक माया का जाल है 
माया को भोगना ही आज का बड़ा तपकर्म है 
माया तो मिलती नहीं कभी किसी को है 
सब तो इस घोर क्षल का दुष्परिणाम है 
दुर्भाग्य सुशोभित धरा का इस कदर बदहाल है 
मांगती है ये कुछ, पर मिलता इसको कुछ और है 
अक्षम्य खेल खेलने में यहाँ लगे सभी हुए हैं 
सुधि इस पावन धरा की देखो किसको अब पड़ी है 


परन्तु ! ! !

अब तो उठो ऐ इस धरा के वीर सपूतों 
दिखा दो तुम अपना दमखम बाहु बल 
दिखा दो भरा है तुममे इतना आत्मबल 
नहीं डिगा सकती तुमको कोई रम्भा या लिओन है
दिखा दे इन बेगैरत अप्सराओं को तू क्या है  
राष्ट्रधर्म से बड़ा कोई तेरा कोई धर्म और कर्म नहीं है 
जो पड़े अभी भी इन अप्सराओं के दिवास्वप्न में हैं 
जग उनको बता तू क्या रखा इस हाड-मांस के तन में है 
चल जाग वीर है तू देख धरा पुकारती तुझको है 
इस धरा से सुन्दर अप्सरा दिखेगी फिर तुझे कहाँ है !!!





15 Dec 2012

Reality of Arvind Kejariwal told by his friend


केजरीवाल और उनके चेलों का असली चेहरा आज आया सामने 





आज शिव प्रताप सिंह श्रीनेत जी (भगवा कुर्ते में) के साथ जंतर-मंतर पर चल रहे असीम त्रिवेदी के अनसन स्थल पर जाना हुआ। अनसनधारी असीम जी तो वहां नहीं मिले क्यूंकि उनको अपने अनसन को बिच में
छोड़ भाग लेने वाले खुजलीवाल जी अपने साथ अनसन तुडवाने हेतु ले कर चले गए थे। परन्तु वहां असीम और खुजलीवाल के बहुत ही करीबी कहे जाने वाले मुकेश जी (सफ़ेद कुर्ते में) मिले। बड़े ही सज्जन पुरुष थे मुकेश जी मैं तो कहूँगा की वो पुरुष ही नहीं थे बल्कि कुछ और थे। अब छोडिये इनके पुरुषत्व के ऊपर क्या चर्चा करें हम मुख्य बिंदु पर पहुंचते हैं।

मैंने कुछ सवाल किये इन मुकेश जनाब से क्यूंकि ये वकालत करते नहीं थक रहे थे खुजलीवाल की। सवाल कुछ इस प्रकार थे और उनके जवाब जो इन मुकेश जनाब ने (दिए जनाब क्यूँ लिख रहा हूँ मैं मुकेश जी के लिए ये इनके जवाबों से आपको दिख जायेगा):


सवाल 1 : खुजलीवाल ने भारत माता का फोटो क्यूँ उतरवाया और वन्देमातरम पर प्रतिबन्ध क्यूँ लगवाया ?
जवाब : ये कोई बात नहीं है इसको छोडो, वैसे भी सेक्युलर दिखाना था खुद को तो ये सब किया गया (अमा यार भारत माता की फोटो एक आतंकी को ही सांप्रदायिक लग सकती है वैसे भी सभी को पता है की बुखारी के कहने पर खुजलीवाल ने ये सब किया)

सवाल 2 : अच्छा ये सेक्युलर होता क्या है ?
जवाब : अरे छोडो इन बातों को (जनाब काहें नहीं कहते हो की दलाली और गुलाम आपकी नजरों में सेक्युलर कहलाता है)

सवाल 3 : शाजिया इल्मी जो की केजरीवाल की बहुत ही करीबी खुजली मिटाने वाली तंत्रिका है वो कम्युनल वायोलेंस बिल का समर्थन करती थी पर अब कह रही है की कभी नहीं किया ?
जवाब : अरे छोडो ये तो बात ही अलग हो गई ! ! !

सवाल 4 : अरे फिर भी कुछ तो बताएं आखिर ऐसा क्यूँ किया जा रहा है जबकि आम आदमी इसके खिलाफ है ?
जवाब : आप कम्युनल बिल के बारे में जानते क्या हैं ? कम्युनल बिल बहुत अच्छा बिल है जिसका हम सभी समर्थन करते हैं और सभी को करना चाहिए सौहार्द्र बढ़ाने के लिए (अमा यार दिमाग है या चकरघिन्नी की पैदाइश हो हम इतना भी नहीं जानते हैं की आप की औकात क्या है दलाल और गुलाम भी कुछ और कर सकते हैं क्या)

सवाल 5 : प्रशांत भूषण जम्मू और कश्मीर पाकिस्तान को दहेज़ में देने की बात कर रहे हैं ?
जवाब : अरे इसको छोडो आप लोग ये डिस्कस करने वाली बात नहीं है क्यूंकि आम आदमी से जुडी बात नहीं है ये

सवाल 6 : केजरीवाल आखिर एक आतंकी अफज़ल गुरु को क्यूँ बचा रहे हैं, क्या ये केजरीवाल का राष्ट्रधर्म है ?
जवाब : आप अफज़ल गुरु को जानते कितना हो। आप वही बोल रहे हो जो मीडिया बोल रही है या दिखा रही है। अफज़ल गुरु आतंकी नहीं है। इस लिए ही तो खुजलीवाल उसको बचा रहे हैं।

ये छठा जवाब सुन कर मेरा पारा फट पड़ा और मैंने कहा की यार काहे नहीं कहते हो सीधे की गुलामी करनी है तुम्हे बुखारी जैसे लोगों की। अगर अफज़ल गुरु आतंकी नहीं है तो सन्नी लिओन भी अभी तक निरा अनछुई कुँवारी कन्या है।

मेरा जवाब सुन खुजलीवाल के करीबी इतने भड़के की वो पूर्व शिव सेना प्रमुख दिवंगत बाला साहेब ठाकरे जी को माँ-बहन की गालियाँ निकालने लगे और उनको आतंकी तक बता दिया तथा आरएसएस तक को इन महानुभाव ने आतंकी संगठन बता दिया और नसीहत दे दी हमें आरएसएस से दूर रहने की परन्तु बुखारी को सबसे बड़ा सेक्युलर और देशभक्त बताया।

"ये जनाब अपनी वाहवाही में ये भी कह गए की ये लोग कांग्रेस की मीटिंग में भी भाग लेते हैं क्यूंकि कांग्रेस भी अच्छा काम कर रही है सिवाय बीजेपी के"

अब भाई हम तो अज्ञानी हैं परन्तु कोई बताएगा हमें इन खुजलीवाल की असलियत (वैसे सवाल जवाब और भी हुए थे कुछ गर्म बहस भी हुई अब उनका जिक्र अगले भाग में)




11 Dec 2012

Kosikalan Riots: Ignorance and Partiality is new Weapon of UP Governemnt

कृष्ण नगरी में मुस्लिम दंगे का दंश झेलते हिन्दू !


दंगे का दिन :- 1 जून, 2012 दिन शुक्रवार, तिथि निर्जला एकादशी समय 2 बजे अपराह्न 


स्थान :- कोसी कलां जिला मथुरा (उत्तर प्रदेश)




नगर कोसीकलां में विगत दिनों में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगा काण्ड की अग्नि अभी तक ज्वाला उगल रही है ! अब वो दंगा पूरी तरह से साम्प्रदायिक रूप ले चुका है ! प्रदेश की समाजवादी सरकार की मुस्लिम-प्रेम वाली राजनीति पूरी तरह से हिन्दुओं के दमन के लिए अपने चरम सीमा पर पहुँच चुकी है ! उस दंगे में हिन्दुओं का बड़े पैमाने पर जान-माल का नुक्सान हुआ था ! हिन्दुओं की कुल संपत्ति के हानि का यदि आकलन किया जाए तो दंगा वाले दिन तीन घंटे चले आतंकी मुस्लिम उत्पात में हिन्दुओं का 10 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ था! उनको मानसिक और शारीरिक हानि हुई सो अलग ! 

वर्तमान समय में सपा शासन और जिला प्रशासन हिन्दुओं को ही उस दंगे का आरोपी बनाकर निशाना बना रहे हैं ! सपा के मुख्य मुस्लिम नेता आज़म खां ने पूरे दंगे की न्यायिक जांच न कराके राजनैतिक जांच कराने के लिए आदेश दिया था! क्योंकि वो जानता था कि मुस्लिम ही पूरे दंगे के लिए दोषी हैं ! उस राजनैतिक जांच में आज़म खाँ ने मुस्लिमों के खिलाफ अधिकांशतः सबूत मिटा दिए और अंततः ये निष्कर्ष निकाला की उस दंगे में 1500 अज्ञात दंगाइयों और लगभग 500 प्रत्यक्ष दंगाई दोषी हैं ! जिनमे सबसे अधिक संख्या हिन्दुओं की है ! नगर के हिन्दुओं में बनिया जाति के सभी व्यवसायियों को अज्ञात दंगाइयों में दिखाया गया है ! हिन्दुओं का पूरा का पूरा बाजार उस दंगे में लिप्त बताया गया है ! और लगभग 55 हिन्दुओं पर 302 और 307 की धारा लगाई गई हैं ! अनेक हिन्दुओं को उनके घरों से उठवाकर जेल भेज दिया गया है ! हिन्दू जनता को शांत रखने के लिए कुछ मुस्लिमों को भी दंगाइयों के रूप में दिखाया गया है ! जिनमे से दो-तीन पुलिस हिरासत में हैं ! 

वास्तव में, ये मुस्लिम समुदाय की राजनैतिक चाल है जिसके द्वारा वो हिन्दुओं को व्यापारिक रूप से तोड़ देना चाहते हैं ! पुलिस हिन्दुओं के लिए धरपकड़ अभियान चलाए हुए है !

इन हिन्दू दंगाइयों में जो अभियुक बनाये गये हैं उनमे से कुछ ऐसे हैं:-

1. जो दो-तीन साल पहले कोसी कलां से अपना सभी कुछ बेचकर दूसरे शहर जीवन यापन करने चले गये हैं, वो दंगाई दिखाए गये हैं !

2. जो व्यवसायी लोग अपंग हैं वो भी दंगाई दिखाए गये हैं !

3. एक मुस्लिम जिसकी मृत्यु 3 वर्ष पूर्व हो चुकी है वो भी दंगे में शामिल दिखाया गया है !

4. प्रतिवर्ष छपने वाले रामलीला के कैलेण्डर में विज्ञापनदाता और पूरी रामलीला कमेटी भी दंगाई दिखाई गयी है !

5. जो बनिया व्यवसायी जिनको अपने व्यापार-धंधे-पेशे से ही मतलब है, जो केवल घर से दुकान और दुकान से घर ही आते-जाते हैं, वो भी दंगाई दिखाए गये हैं !

6. आसपास के ग्रामों के अनेक हिन्दू प्रधानों और जमींदारों को भी दंगा करने वाला दिखाया गया है !

7. जो व्यक्ति दंगा के समय नगर के बाहर थे, वो भी दंगाई दिखाए गये हैं !

8. नगर के अनेक प्रतिष्ठित हिन्दू व्यवसायियों को दंगे के मुख्य आरोपी बनाकर पूरे प्रकरण को राजनैतिक रूप दे दिया गया है !

9. नगर में ऐसा भी हो रहा है की मुसलमान के कुछ दबंग राजनैतिक लोग हिन्दुओं व्यवसायियों को डरा-धमकाकर उनसे मनचाही धनराशि बसूल कर रहे हैं ! हिन्दुओं के द्वारा ऐसा न करने पर वो मुस्लिम प्रशासन पर राजनैतिक दबाव डालकर उन हिन्दुओं को दंगाई दिखा रहे हैं ! 

कुल मिलकर मुस्लिम वर्ग की और प्रदेश सरकार समाजवादी पार्टी की यह एक सोची-समझी राजनैतिक चाल है जिसके आधार पर हिन्दुओं की एकता वाली रीड़ की हड्डी तोड़कर उनको अपाहिज बना दिया जाए और मुस्लिम समुदाय अपना वर्चस्व स्थापित करने में सफल हो जाए !


नगर के हिन्दुओं में रोष व्याप्त है और वो अब आर या पार की जंग के मूड में आ गये हैं ! लेकिन शासन और प्रशासन हिन्दुओं पर डंडा किये हुए है ! जो हिन्दू प्रशासन के इस एकपक्षीय कार्यप्रणाली के विरुद्ध आवाज़ उठा रहा है वो अज्ञात दंगाई में दिखाकर जेल में ठूसा जा रहा है ! हिन्दुओं को मोहरा बनाकर उन पर हो रहे इस प्रशासनिक अत्याचार के विरोध में 12 दिसंबर 2012 को कोसी नगर बंद का एलान किया गया है ! जिनमे अनेक हिन्दू व्यवसायी जिनको दंगे के झूठे आरोप में अभियुक्त बनाया गया है वो अपनी गिरफ्तारी देंगे !

पूर्वार्ध में हुए कोसीकलां दंगे की जानकारी हेतु आप निम्न लिंक को देख सकते हैं जिनपर सिलसिलेवार घटनाक्रम दिया हुआ है।


http://ekaambhartiya.blogspot.in/2012/06/blog-post_16.html (कोसीकलां दंगा कैसे हुआ शुरू)
http://ekaambhartiya.blogspot.in/2012/06/blog-post_18.html (पूरा दंगा घटनाक्रम)
http://ekaambhartiya.blogspot.in/2012/06/blog-post_19.html (ताजा जानकारी दंगे की)
http://ekaambhartiya.blogspot.in/2012/06/blog-post_6300.html (दंगे की कहानी बयान करते चित्र)



!! नमो भारतं !!




2 Dec 2012

भ से भारत एवं भ से भगवा, याद रख ! ! !


घायल पड़ी है भारत माता 
लहूलुहान है उसकी छाती
धर्म क्षेत्र का ध्वज गिरा है 
धर्म के नाम पर हो रहा अधर्म है 

जीना था धर्म हित में जीवन 
स्वार्थी मन से कुल्सित था बदन 
निज अंगों को करके भंग हम 
वर्गों के पीछे भागते हैं हम 

विसरा देते हैं राष्ट्रदेवी के 
करुण क्रंदन और पुकार को 
देवी का वक्ष भी चीरा हुआ है 
तपस्वी भोगी भी निरा हुआ है 

फड़का दे सुस्त पड़ी भुजाओं को
फिर देख कैसे भागता है दुश्मन 
कर पैदा पुनः राणा के भय को 
न ला कभी अपने अन्दर तू मय को

एक हाथ तो उठा तू पहले ऐ पगले 
फिर देख की कैसे लगता है मेला 
बड़ा सौन्दर्य है इस लाल रंग में 
बहता है जो तेरे रग-रग में 

धरती है ये वीरों की तू याद रख 
भाल, ढाल और काल को साथ रख 
बढ़ता चल तू इस पथ पर ऐसे पार्थ 
जैसे धर्म की रक्षा को उठते हो हाथ 

करता रहा अर्पण अब तक तू फूल था 
अब बारी आई बलिदान के शूल की 
मत माफ़ कर तू गद्दारों के भूल को 
काट शीश अर्पण कर भारत-माता को

तन में भगवा, तन पर भगवा 
उसके ऊपर दिल और जान भी भगवा
अपना तो कर्म है भगवा, धर्म है भगवा
भ से भारत एवं भ से भगवा, याद रख 



30 Nov 2012

Chitra Narayanan : Ambassador Swiss retired but keep refusing to handover charge to her Successor

चित्रा नारायणन : स्विस एम्बेसडर रिटायर्मेंट के बाद भी अपने बदले किसी और को पद पर ज्वाइन नहीं करने दे रहीं ! ! ! 


अब लो भाई उच्चस्थ पदों पर रहे महानुभाओं के बच्चे अभी भी खुद को उसी उच्चस्थ पद पर मान रहे हैं  तथा खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की हक़ से बेईजत्ति करने में दिलोजान से लगे हुए हैं 

"के आर नारायणन" जो की कभी भारत के प्रथम व्यक्ति (राष्ट्रपति) रहे थे की सुपुत्री "चित्रा नारायणन" जो की एक "आईएफएस" ऑफिसर हैं और स्विट्ज़रलैंड में 2008 से ही भारतीय राजदूत के पद पर शुसोभित हैं। वैसे भारतीय राजदूत का कार्यकाल 3 वर्षों का होता है और ज्ञात रहे की माननीया चित्रा जी 2011 में ही रिटायर हो चुकी हैं। लेकिन पद पर मिले या कहें तो अभी भी मिल रहे लाभों के लोभ में अपने पद को छोड़ने को तैयार नहीं हैं तथा चित्रा जी को कार्यावकाशोपरांत पद भार ग्रहण करने पहुँचे ऑफिसर को पिछले 1 साल से अनवरत इंतजार में व्यतीत करना पड़ रहा है। इसके साथ-साथ हमारी मौजूदा सरकार इनको पद का एक्सटेंसन दिए जा रही है।

साथ ही ये भी ध्यान देने वाली बात है की इसमें भारत की ही बेईजत्ति हो रही है परन्तु हमारे देश की महान और एक मात्र बची हुई स्वघोषित देशभक्त सरकार अपने होठों को मोटे धागे से सील कर मुर्दानगी वाली चुप्पी साधे हुए है।


लेकिन इस देश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई इस बेईजत्ति के जघन्य तथा अक्षम्य कृत्य को आप क्या नाम देना चाहेंगे-----

1. स्वयंभू ऐश करने वाले राजनेताओं द्वारा घोषित दलित विवादस्पद विषय ?
2. सभी ऐसे देशभक्त कार्यों की जननी स्थल 10 जनपथ का एक और महान कार्य ?
3. साधारण सी घटना जो ध्यान देने योग्य नहीं है ?
4. या की सारे काले कारनामों की संधि-संगम समागम स्थल स्विस बैंक का सर्विसिंग विषय ?

सबसे अहम् सवाल एक और है कि इतनी बड़ी बेईजत्ति जो देश की हुई और अभी भी जारी है लेकिन किसी भी मीडिया को इस खबर से कोई फर्क नहीं पड़ा जैसे की ये खबर उनके लिए कोई मायने नहीं रखती है या कहें तो इनके द्वारा बनाये गए एक मात्र देशभक्त पार्टी की भद पीट रही थी और एक और छुपा हुआ चेहरा उजागर हो रहा था तो मीडिया ने इस खबर को कहीं भी डाला ही नहीं और इस तरह से हमारी महानतम मीडिया ने अपने स्वामिभक्ति का परिचय दिया।

अब जवाब कौन देगा इस बेईजत्ति का जो देश की हुई है ये देश की जनता के हाथों में है अब जनता जनार्दन निर्णय ले की करना क्या है और कैसे करना है तथा देश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई इस बेईजत्ति का जवाब कैसे देना है ये भी निर्णय करें ! ! !

वैसे एक और बात ज्ञात रहे की डॉ0 के आर नारायणन के नाम पर "डॉ0 के आर नारायणन सेण्टर फॉर दलित एंड मईनोरितिज स्टडीज (Dr. K. R. Narayanan Centre for Dalit and Minorities Studies) चलता है लेकिन दलित और मईनोरितिज के नाम पर फायदा किसको पहुँच रहा है ये भी जरा आंकलन करें आप सभी।


प्राइम ग्रुप में 23 अप्रैल 2012 को बिताया हुआ चित्रा नारायणन जी का सुखद पल (क्या यही वो पल हैं जो रिटायर्मेंट के बाद भी इस पद को छोड़ने नहीं दे रहे हैं और मौजूदा सरकार भी नहीं चाहती है ये महोदया हटें या पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है )